भगवान भरोसे है गोड्डा की बिजली व्यवस्था, अब उसकी खबर लेगी कांग्रेस

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गोड्डा/झारखंड:  गोड्डा में शहर से लेकर गांव तक बिजली की हालत सरकार की नाकामी का वो सर्टिफिकेट है जिसमें ये लिखा है कि ‘मेरा इंतजार मत करना।‘ क्योंकि गोड्डा में जिसने भी बिजली का इंतजार किया उसकी आंखें पथरा गई लेकिन तारों के भीतर करंट नहीं दौड़ा। क्योंकि यहां बिजली कब आएगी और कब आपको उसके दर्शन होंगे इसके बारे में कोई नहीं बता सकता। विभाग के इंजीनियर से लेकर लाइनमैन तक अपने हथियार डाल चुके हैं। क्योंकि बिजली कटने की वजह बताने के लिए उन्हें एक ब्रह्म वाक्य मिल चुका है कि ‘मेन लाइन में फॉल्ट है।‘

इसी मेन लाइन की मरम्मत के लिए गर्मी शुरु होने से पहले घंटों बिजली गायब रहती थी। तब कहा जाता था कि हफ्ते दो हफ्ते में सबकुछ दुरुस्त हो जाएगा। लेकिन वो समय जब बीत गया तब भी हालात वही रहे। 24 घंटे में अगर 12 घंटे भी बिजली मिल जाए तो गोड्डावासी खुद कि निहाल समझते हैं। लेकिन ऐसा होता कम है।

बिजली विभाग की इसी कामचोरी, कमजोरी और बहानेबाजी की खबर लेने कांग्रेस सड़कों पर निकली है। 15 सितंबर को कांग्रेस बिजली दफ्तर के सामने विरोध प्रदर्शन करेगी, और बिजली सप्लाई की जिम्मेदारी संभाल रहे बाबुओं से पूछेगी बताओ बिजली कब बहाल होगी। हालात कब सुधरेंगे और रघुवर सरकार ने जो चकाचौंध झारखंड के सपना दिखाया था वो हकीकत में खुली आंखों से कब देख सकेगी जनता।

जिले में बिजली की इसी समस्या को लेकर जिला कांग्रेस मुख्यालय में जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपिका पांडे सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस की। जिसमें उन्होंने लोगों से अपील की, कि ‘बिजली नहीं तो बिल नहीं।‘ यानि अगर विभाग आपको बिजली नहीं दे रहा है तो आप उसे बिल मत दीजिये। अपनी इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए अगले चरण में 15 सितंबर को जिला विद्युत कार्यालय में कांग्रेस की तरफ से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

हद तो तब हो गई थी जब पिछले महीने 23 को सीएम रघुवर दास गोड्डा के दौरे पर थे। रात को भी यहीं पर ठहरे थे। लेकिन इसके बावजूद पूरा शहर अंधेरे में डूबा रहा। कोई खोज खबर लेनेवाला नहीं था। इससे हालात की गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है। सूबे के मुखिया बिजली विभाग के दफ्तर से महज 1 किलोमीटर दूर ठहरे थे। लेकिन उस खास दिन भी पूरे शहर को अंधेरे में ही रात गुजारनी पड़ी। दिन की तो पूछिये ही मत।

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